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Lingashtakam Lyrics in Hindi | गीत, अर्थ, लाभ | हिंदी में पढ़ें

ॐ नमः शिवाय! पवित्र मंत्रों के उच्चारण की गूंज के साथ चारों ओर गूंज रहा है और अगरबत्ती का धुआं आसमान की ओर उठ रहा है, आइए हम सर्वोच्च शक्ति, भगवान शिव के सामने अपना सिर झुकाएं। उनकी कृपा प्रत्येक ब्रह्मांडीय कंपन में गूंजती है, उनका नृत्य सृजन और विनाश के ताल का शासन करता है, और उनके ज्ञान की गूंज उनकी स्तुति में गाए जाने वाले प्राचीन भजनों में सुनाई देती है।

Lingashtakam Lyrics in Hindi
ऐसा ही एक शक्तिशाली भजन, जो दिव्य ऊर्जा से विकीर्ण होता है, "Lingashtakam Lyrics in Hindi" है। आदरणीय आदि शंकराचार्य द्वारा रचित, यह आठ-छंद वाला स्तोत्र भगवान शिव को उनके प्रतिष्ठित रूप - शिवलिंग को अर्पित एक गीतात्मक भेंट है। सिर्फ शब्दों से अधिक, "लिंगाष्टकम" शिव के आशीर्वाद का द्वार है, एक ऐसी चाबी जो शांति प्रदान करती है, बाधाओं को दूर करती है और भक्त पर उनकी असीम कृपा बरसाती है।

कल्पना कीजिए कि आप प्रत्येक छंद का जाप कर रहे हैं, महसूस कर रहे हैं कि कंपन आपके दिल के अंदर गूंज रहे हैं, नकारात्मकता को धो रहे हैं और आपको शांति से भर रहे हैं। उस शिवलिंग की कल्पना करें जो आपकी भक्ति की कोमल रोशनी में नहाया हुआ है, क्योंकि पवित्र शब्द आपकी चिंताओं को दूर करते हैं और आध्यात्मिक विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यही, मेरे दोस्तों, "Lingashtakam Lyrics in Hindi" का जादू है।

Lingashtakam lyrics in hindi श्लोक १

ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं 

निर्मलभासितशोभितलिङ्गम्।

जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं 

तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥१॥

अर्थ: ब्रह्मा, विष्णु और अन्य देवताओं द्वारा पूजित शिवलिंग,जो निर्मलता से चमकता है और संसारिक दुःख को नष्ट करने वाला है। मैं हमेशा ऐसे शिवलिंग को प्रणाम करता हूँ।

इस श्लोक के लाभ/महत्व

इस श्लोक का पाठ करने से भगवान शिव की उपस्थिति का आह्वान होता है, जो देवताओं द्वारा पूजित हैं। यह निर्मलता, प्रकाश, और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति लाता है।

Lingashtakam lyrics in hindi श्लोक २

देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं 

कामदहं करुणाकरलिङ्गम्।

रावणदर्पविनाशनलिङ्गं 

तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥२॥

 अर्थ: मुनियों और देवताओं द्वारा पूजित शिवलिंग, जो इच्छाओं को पूरा करता है और दयालुता से श्रीशिव की कृपा देता है। यह रावण जैसे राक्षसों के गर्व को नष्ट करता है।

इस श्लोक का पाठ करने के लाभ/महत्व

इस श्लोक का पाठ करने से इच्छाओं की पूर्ति होती है और भगवान शिव की करुणापूर्ण आशीर्वाद मिलता है। यह अहंकार और अभिमान को दूर करने में सहायक होता है, जो आध्यात्मिक उन्नति में मदद करता है।

Lingashtakam lyrics in hindi श्लोक ३

सर्वसुखप्रदलिङ्गं भवानीसहितमैश्वर्यनिर्मितलिङ्गम्।

स्वर्गापवर्गवर्गलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥३॥

अर्थ:जो सभी सुख देता है, मां भवानी के साथ रहता है और दिव्य ऐश्वर्य से सम्पन्न है, ऐसा शिवलिंग, उसे हमेशा प्रणाम करता हूँ।

इस श्लोक के महत्व/लाभ

इस श्लोक का पाठ करने से सभी प्रकार की समृद्धि और खुशियाँ मिलती हैंजो भगवान शिव की देवी भवानी के साथ उपस्थिति के साथ आती हैं। यह स्वर्गीय सफलता और आध्यात्मिक मुक्ति दोनों को प्राप्त करने में सहायक होता है। 

Lingashtakam lyrics in hindi श्लोक ४

भक्तप्रियलिङ्गं सुरघुरुर्वरलिङ्गं 

स्वजनप्रियलिङ्गम्।

अन्येषामपि वरदलिङ्गं 

तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥४॥

अर्थ: भक्तों का प्रिय शिवलिंग, जो उनके परिजनों का भी प्रिय है, ऐसा शिवलिंग, हमेशा मैं प्रणाम करता हूँ।


इस श्लोक का पाठ करने से प्राप्त होने वाले लाभ/महत्व

यह श्लोक भक्तों के लिए लाभकारी है क्योंकि इससे उनका भगवान शिव के साथ गहरा संबंध बढ़ता है, जो देवताओं और मानवों के द्वारा प्रिय हैं। यह आशीर्वाद और प्रार्थनाओं की पूर्ति लाता है।

Lingashtakam lyrics in hindi श्लोक ५

महादेवममितलिङ्गं महाकालममितलिङ्गम्।

महाकालममितलिङ्गं महाकालममितलिङ्गम्॥५॥

अर्थ: जो अमित काल का निर्माण करने वाला है, उसे हमेशा मैं प्रणाम करता हूँ। 

इस श्लोक के महत्व/लाभ

इस श्लोक का पाठ करने से भगवान शिव की अनन्तता और शाश्वत अस्तित्व का आह्वान होता हैजो समय और स्थान के पार की ताकत का प्रतिनिधित्वकरते हैं। यह आध्यात्मिक साधना में स्थिरता और आधार प्रदान करता है। 

Lingashtakam lyrics in hindi श्लोक ६

आत्मलिङ्गं गिरिजासुतावरलिङ्गं 

यमजादिप्रमथपालनलिङ्गम्।

दक्षिणामूर्त्यविमोचनलिङ्गं 

तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥६॥

अर्थ: आत्मा का लिंग, जो माता पार्वती के साथ रहता है, और यम जैसे देवताओं की रक्षा करता है, ऐसा शिवलिंग, हमेशा मैं प्रणाम करता हूँ।


इस श्लोक का पाठ करने के लाभ/महत्व

इस श्लोक का पाठ करने से आत्मा का लिंग और भगवान शिव की संरक्षा की खोज की जा सकती है, जो अज्ञान को दूर करते हैं और दुनियावी बंधन से आत्मा को मुक्त करते हैं।

Lingashtakam lyrics in hindi श्लोक ७

अश्वरूढासुरवन्दितलिङ्गं 

अश्वमध्यासुरवन्दितलिङ्गम्।

काशीपुराधिपवन्दितलिङ्गं 

तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥७॥

अर्थ: जिसे अश्वरूप और राक्षसों द्वारा पूजित किया जाता है, और काशीपुर के राजा द्वारा पूजित किया जाता है, ऐसा शिवलिंग, हमेशा मैं प्रणाम करता हूँ।


इस श्लोक के महत्व/लाभ

यह श्लोक विभिन्न रूपों में भगवान शिव की कृपा लाता है, जैसे राक्षसों के नाश के रूप में और काशी के राजा की पूजा के रूप में। यह समस्याओं को निवारण करने में मदद करता है और सफलता प्राप्त करने में सहायक होता है।

Lingashtakam lyrics in hindi श्लोक ८

सोमसूर्याग्निलोचनलिङ्गं 

सोमसूर्याग्निलोचनलिङ्गम्।

सोमसूर्याग्निलोचनलिङ्गं 

सोमसूर्याग्निलोचनलिङ्गम्॥८॥

अर्थ: सोम, सूर्य और अग्नि के रूप में चमकता हुआ शिवलिंग, हमेशा मैं प्रणाम करता हूँ।


इस श्लोक का पाठ करने से प्राप्त होने वाले लाभ/महत्व

इस श्लोक का पाठ करने से भगवान शिव की अनन्त आवाज आती है, जो सोम, सूर्य, और अग्नि के रूप में चमकते हैं। यह ज्ञान, प्राण, और आध्यात्मिक जागरूकता लाता है।

यहाँ, "लिङ्गाष्टकम्" के श्लोकों का पूरा संग प्रस्तुत किया गया है, जिसे आसानी से पढ़ा जा सके और संदर्भ के लिए विभाजित किया गया है। इन श्लोकों का अध्ययन करके, हम शिवलिंग की महिमा को समझते हैं और उसकी पूजा करने से हमें किसी भी प्रकार की समस्या से छुटकारा मिलता है।


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